विजय थलापति की पार्टी, तमिलगा वेट्टी कज़गम (TVK), 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में एक बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। हालांकि वे बहुमत के आंकड़े (118 सीटें) से थोड़ा पीछे रह गए, लेकिन उनकी जीत के पीछे कई रणनीतिक और सामाजिक कारण रहे हैं:
1. शानदार चुनावी प्रदर्शन
- सीटें और वोट शेयर: TVK ने अपनी पहली ही चुनावी लड़ाई में 108 सीटें जीतीं। पार्टी ने लगभग 35.1% वोट शेयर हासिल किया, जो किसी भी नई पार्टी के लिए एक रिकॉर्ड है।
- विजय की व्यक्तिगत जीत: विजय ने खुद दो सीटों—पेरंबूर और त्रिची ईस्ट—से चुनाव लड़ा और दोनों पर बड़े अंतर से जीत हासिल की।
- दिग्गजों की हार: इस चुनाव की सबसे बड़ी खबर मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की कोलाथुर सीट से हार रही, जहाँ उन्हें TVK के उम्मीदवार वी.एस. बाबू ने हराया।
2. जीत की मुख्य रणनीतियाँ
- प्रशंसक नेटवर्क का राजनीतिकरण: विजय ने अपने ‘रसिगर मंद्रम’ (प्रशंसक संघों) को धीरे-धीरे एक मजबूत राजनीतिक कैडर में बदला। इन संघों ने सालों तक रक्तदान शिविर और राहत कार्यों के जरिए जमीनी स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
- युवा और पहली बार के मतदाता: विजय की “MGR 2.0” वाली छवि और ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में उभरने की रणनीति ने उन युवाओं को आकर्षित किया जो DMK-AIADMK के दशकों पुराने चक्र से बदलाव चाहते थे।
- स्वतंत्र पहचान: उन्होंने किसी बड़े गठबंधन का हिस्सा बनने के बजाय सभी 234 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया, जिससे उनकी छवि एक “साफ-सुथरे और मजबूत विकल्प” के रूप में बनी।
- क्षेत्रीय पकड़: TVK ने उत्तर तमिलनाडु में सबसे शानदार प्रदर्शन किया, जहाँ उसने 84 में से 43 सीटें जीतीं। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में भी पार्टी ने DMK के पारंपरिक किलों में सेंध लगाई।
3. सामाजिक और राजनीतिक कारक
- सत्ता विरोधी लहर (Anti-Incumbency): सत्तारूढ़ DMK के खिलाफ भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोपों ने भी विजय के पक्ष में माहौल बनाया।
- द्रविड़ राजनीति में बदलाव: विजय की जीत ने तमिलनाडु की पांच दशक पुरानी द्विध्रुवीय राजनीति (DMK बनाम AIADMK) को खत्म कर इसे त्रिकोणीय बना दिया है।
वर्तमान में, विजय की पार्टी 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है और सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत से केवल 10 सीटें दूर है।















Leave a Reply